कोरोना संकट / इससे 2.5 करोड़ लोगों की जा सकती है नौकरी, बेरोजगारी से निपटना सभी देशों के लिए मुश्किल काम
कोरोना वायरस के गंभीर प्रकोप से सबसे ज्यादा असर रोजगार पर पड़ने की संभावना है। वैश्विक स्तर पर कामगारों में इस बात का डर भी सता रहा है कि कोरोना वायरस की मंदी उनकी नौकरी को ले डूबे। साथ ही इस हफ्ते से विश्व के कई देशों में वेलफेयर के दावों को भी शुरू किया जा चुका है जिसमें लाखों लोग शामिल है। ऐसी उम्मीद है कि इस महामारी से वैश्विक स्तर पर 25 मिलियन (2.5 करोड़) रोजगार पर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
1930 से भी भयानक हो सकते हैं हालात
इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन ने चेतावनी दी है कि अगर वायरस को सही समय पर नियंत्रण में नहीं लाया जाता है तो इससे 2.5 करोड़ लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। रोजगार में यह कटौरी ऑस्ट्रिया से लेकर अमेरिका तक दिखेगी जहां इस महामारी के गंभीर खतरे नजर आ रहे हैं। रोजगार पर यह प्रहार 1930 से भी भयंकर हो सकता है जहां उस समय भी महामारी से आर्थिक मंदी हुई थी।
विकसित देशों में भी बढ़ेगी बेरोजगारी
जेपी मोर्गन चेस एंड कंपनी के अर्थशास्त्री ने अनुमान लगाया है कि विकसित देशों में बेरोजगारी के प्रति उनके उठाए गए कदम से वहां के बाजारों में इस साल के मध्य तक 2.7 फीसदी की बढोत्तरी दिख सकती है। हालांकि इस साल के शुरुआत से लेकर अब तक यह चार दशक के निचले स्तर पर आ चुका है। हालांकि थोड़ी बहुत रिकवरी से अभी भी अमेरिका में बेरोजगारी दर के बारे में अनुमान है कि वह 4.6 फीसदी और यूरोप में 8.30 फीसदी बढ़ सकती ह


कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो घर जाने के लिए दोपहिया वाहनों का सहारा ले रहे हैं। एक ही बाइक पर सवार तीन से चार तक लोग जान जोखिम में डालकर गोरखपुर, बलिया और बनारस सहित अन्य जिलों तक पहुंचने के प्रयास में हैं। ये जिले सैकड़ों किमी दूर हैं, इसके बावजूद उनका लक्ष्य रहता है कि सूरज निकलने से पहले वे अपने घर के दरवाजे तक किसी तरह पहुंच जाएं। लोगों का कहना है कि वे मुसीबत की घड़ी में सरकार का पूरा साथ दे रहे हैैं, लेकिन सरकार को चाहिए कि उन्हें घर तक पहुंचाने का उचित इंतजाम कर दे।

पैदल ही घर के लिए निकले राहगीरों को बिठाने के लिए कुछ कार चालक मनमाना किराया वसूूल रहे हैं। कई बार तो ये उनसे मोटी रकम लेकर घरों तक पहुंचाने का भी सौदा कर रहे हैं। ऐसा ही हाल फरीदाबाद के मथुुरा हाईवे का भी है। यहां पुलिस से बचने के लिए लोग कालिंदी कुंज के नहर वाले रास्ते से हरियाणा की ओर जा रहे हैं।
कोरोना वायरस जहां एक ओर लोगों को बीमार कर रहा है तो वहीं इसके कारण असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों मजदूर अचानक बेरोजगार हो गए हैं। देश में ऐसे मजदूरों की संख्या करीब 42 करोड़ हैं जो निर्माण, पेंटर, लकड़ी व लोहे या खेतों में मजूदरी करते या फिर कारखानों में दैनिक मजदूरी करते हैं। राजधानी दिल्ली में ऐसे असंख्य मजदूर हैं जिनके पास काम नहीं है और वह अपने प्रदेशों को जाने में भी असमर्थ हैं। ऐसे में उनके सामने रोजी व रोटी का संकट खड़ा हो गया है। आने वाले दिनों में इन मजदूरों के लिए यह संकट और भी गहराएगा।
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