सतलोक_चलना_है

सतलोक में पृथ्वी की तरह कोई युद्ध, लड़ाई झगड़े, राग द्वेष नहीं होते। क्योंकि वहां किसी चीज़ की कमी नहीं। सबका अलग स्थान है। सबके अपने निजी विमान हैं। कोई अमीर गरीब का भेद नहीं।

हम सभी मनुष्य व जितने भी जीव जंतु हैं पहले सतलोक में रहते थे वहाँ जन्म मरण नहीं होता है और हम कभी दुःखी नहीं होते और पूर्ण परमात्मा की भक्ति करते हैं।

ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 18 में प्रमाण है कि पूर्ण परमात्मा कविर्देव तीसरे मुक्ति धाम अर्थात् सतलोक में रहता है। जहाँ जाने के बाद मनुष्य का फिर से जन्म मरण नहीं होता है

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